गांव बाडिया भाऊ की बेटी आरती चौहान बनी राजस्थान पुलिस कांस्टेबल, गांव में जश्न का माहौल

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जवाजा। गांव बाडिया भाऊ की बेटी आरती चौहान, पुत्री संतोष सिंह, ने मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर Rajasthan Police सेवा में स्थान पाकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आरती के पुलिस सेवा में जॉइनिंग की खबर मिलते ही गांव में उत्साह और गर्व का माहौल बन गया। ग्रामवासियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ माला पहनाकर आरती का भव्य स्वागत किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
आरती ने बताया कि उन्होंने राजस्थान पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2025 की लिखित परीक्षा में सफलता हासिल की। इसके बाद 21 दिसंबर 2025 को शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। सभी चरण पूरे होने के बाद अब 10 जनवरी 2026 को उन्हें बाड़मेर हैडक्वाटर रिपोर्ट करना है, जिसके पश्चात जयपुर में उनकी औपचारिक जॉइनिंग होगी।
अपनी सफलता का श्रेय आरती ने माता-पिता के साथ-साथ परिवार और क्षेत्र के सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि “मेरे माता-पिता मेरे सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। मैंने रोज़ाना करीब 8 घंटे कड़ी मेहनत के साथ पढ़ाई और फिजिकल ट्रेनिंग की।” आरती ने अपने मामा व फिजिकल ट्रेनर शिवचरण सिंह का विशेष रूप से आभार जताया, जिन्होंने कठिन समय में हिम्मत, जज़्बा और सही मार्गदर्शन दिया।
आरती ने बताया कि उनका सपना यहीं नहीं रुकता। “मेरा लक्ष्य पुलिस लाइन में उच्च अधिकारी के पद तक पहुंचकर ईमानदारी और निष्ठा से सेवा करना है।” आरती की इस उपलब्धि से न केवल गांव बाडिया भाऊ बल्कि पूरे जवाजा क्षेत्र में बेटियों को आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है।
ग्रामवासियों ने कहा कि आरती की सफलता यह साबित करती है कि अगर लगन और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण क्षेत्र की बेटियां भी बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं। आरती चौहान आज क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन चुकी हैं।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।