मनरेगा कार्यों की स्वीकृति में देरी से गांव में रोज़गार संकट मार्च से एक भी काम नहीं, श्रमिक बेरोजगार—जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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जवाजा |
जवाजा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत सूरजपुरा के राजस्व ग्राम बागलिया में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्य स्वीकृति नहीं होने से ग्रामीण श्रमिकों पर रोज़गार का गहरा संकट खड़ा हो गया है। पिछले कई महीनों से मनरेगा के अंतर्गत कोई भी कार्य स्वीकृत नहीं होने के कारण श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर ब्यावर को ज्ञापन सौंपकर शीघ्र कार्य स्वीकृत कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि मार्च 2025 से अब तक ग्राम बागलिया में एक भी मनरेगा कार्य स्वीकृत नहीं हुआ, जिसके चलते श्रमिकों के मानव दिवस सृजित नहीं हो सके। रोजगार के अभाव में बड़ी संख्या में मजदूर घर बैठने को मजबूर हैं और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी कठिन होता जा रहा है। कई परिवारों के सामने रोज़मर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दवाइयों तक की समस्या खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा रोजगार सृजन के उद्देश्य से समय पर दो प्रस्ताव तैयार कर पंचायत समिति जवाजा को भेजे गए थे। इनमें पहला प्रस्ताव हीरा सिंह के मकान के पास नाड़ी निर्माण कार्य से संबंधित है, जिसे 17 अक्टूबर 2025 को भेजा गया था, जबकि दूसरा प्रस्ताव नवीन नाड़ी निर्माण कार्य, बागलिया बोचमाल का है, जिसे 27 नवंबर 2025 को स्वीकृति हेतु प्रेषित किया गया। इसके बावजूद अब तक किसी भी प्रस्ताव पर स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में विकास अधिकारी को भी कई बार अवगत कराया गया, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। मनरेगा कार्य ठप होने से श्रमिक न केवल रोजगार से वंचित हैं, बल्कि सरकार की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का पूरा लाभ भी नहीं ले पा रहे हैं। मजबूरी में कुछ परिवार पलायन की सोचने लगे हैं, जिससे गांव का सामाजिक और आर्थिक ढांचा प्रभावित हो रहा है।

जवाजा विकास अधिकारी बलराम मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायत सूरजपुरा से मनरेगा के तहत आए दो नाड़ी निर्माण कार्यों के प्रस्तावों में पहले कुछ तकनीकी कमियां थीं, इसलिए लगभग दो माह पहले जिला परिषद ने उन्हें सुधार के लिए वापस भेज दिया था।
उन्होंने कहा कि अब सभी कमियां दूर कर प्रस्ताव दोबारा जमा कर दिए गए हैं और स्वीकृति मिल चुकी है। आने वाले कुछ दिनों में कार्य शुरू होने की पूरी संभावना है, जिससे ग्रामीणों को जल्द ही रोजगार मिलेगा।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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