25 हजार का इनामी डोडा-पोस्त तस्कर गिरफ्तार, जवाजा पुलिस की बड़ी सफलता

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जवाजा। मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में राजस्थान पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जवाजा थाना पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी डोडा-पोस्त तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी लंबे समय से फरार था और पुलिस की पकड़ से बचता आ रहा था।
पुलिस अधीक्षक ब्यावर के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के सुपरविजन में यह कार्रवाई की गई। जवाजा थाना पुलिस टीम ने 3 जनवरी 2025 को थाना कल्याणपुर, जिला बालोतरा के सहयोग से कार्रवाई करते हुए आरोपी नवल किशोर उर्फ नवलाराम को डिटेन कर जवाजा लाया। पूछताछ के बाद 4 जनवरी 2026 को उसे विधिवत गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार आरोपी नवल किशोर पुत्र हरिराम, उम्र 35 वर्ष, निवासी नेहड़ा, थाना जैतपुर, जिला पाली है। उसके खिलाफ थाना जवाजा में एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज है। इससे पूर्व आरोपी के कब्जे से 1789 किलोग्राम डोडा-पोस्त और 780 ग्राम अफीम जब्त की जा चुकी है।
आरोपी के खिलाफ अजमेर और चित्तौड़गढ़ सहित अन्य जिलों में भी मादक पदार्थ तस्करी के कई मामले दर्ज हैं। आरोपी पर कुल 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था, जिसमें 20 हजार रुपये जिला पुलिस अधीक्षक ब्यावर और 5 हजार रुपये पुलिस थाना मंगरोल, जिला चित्तौड़गढ़ द्वारा घोषित किए गए थे।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस अब उससे तस्करी नेटवर्क, सप्लाई चैन और अन्य सहयोगियों के बारे में गहन पूछताछ कर रही है। जवाजा पुलिस की इस कार्रवाई को मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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