जवाजा ब्लॉक में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की आमुखीकरण कार्यशाला संपन्न 2027 तक पूर्ण साक्षर भारत का लक्ष्य — शिक्षकों, सर्वेयरों और अधिकारियों ने लिया ज्ञान की ज्योति जलाने का संकल्प

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जवाजा ब्लॉक में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम की आमुखीकरण कार्यशाला संपन्न
2027 तक पूर्ण साक्षर भारत का लक्ष्य — शिक्षकों, सर्वेयरों और अधिकारियों ने लिया ज्ञान की ज्योति जलाने का संकल्प

जवाजा, 4 नवंबर।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जवाजा के सभागार में मंगलवार को नवभारत साक्षरता कार्यक्रम (NILP) 2022-2027 के तहत आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्लॉक स्तर के अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, साक्षरता प्रभारी और सर्वेयर बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य वर्ष 2027 तक भारत को पूर्ण साक्षर बनाना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कविता मौर्य ने की।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हर्षवर्धन शर्मा व कैलाश चंद, उपपंजीयक अधिकारी आदित्य मेहरा, पंचायत समिति प्रधान गणपत सिंह, जवाजा सरपंच प्रशासक प्रतिनिधि संजय सोनी, RP पूरणचंद, साक्षरता ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सुरेन्द्र सिंह टॉडगढ़, मुख्य वार्ताकार ताराचंद जांगिड़ व नेमीचंद यादव, दक्ष प्रशिक्षक नारायण सिंह व रविन्द्र सिंह तथा Udise प्रभारी मदन सिंह उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत से हुआ। प्रधानाचार्य जितेंद्र सिंह ने साफा बंधन और माल्यार्पण कर सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।
साक्षरता से आत्मनिर्भरता की ओर कदम

साक्षरता ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सुरेन्द्र सिंह टॉडगढ़ ने बताया कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का लक्ष्य हर नागरिक को शिक्षा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर व्यक्तियों का पंजीकरण “उलास ऐप” के माध्यम से किया जा रहा है।
यह ऐप डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक बड़ी पहल है, जिससे असाक्षर नागरिकों को पढ़ना-लिखना ही नहीं बल्कि डिजिटल और बैंकिंग साक्षरता का ज्ञान भी मिलेगा।

कार्यशाला में डिजिटल साक्षरता, बैंकिंग ज्ञान, जीवनोपयोगी शिक्षा और स्वावलंबन पर विशेष चर्चा की गई।
शिक्षकों और सर्वेयरों को बताया गया कि साक्षरता अब केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन में आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
जवाजा ब्लॉक ने किया सराहनीय कार्य

ब्लॉक जवाजा को वर्ष 2025-26 के लिए 10700 शिक्षार्थियों का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। इनमें से अब तक 9689 शिक्षार्थियों का पंजीकरण “उलास ऐप” के माध्यम से किया जा चुका है।
इनमें से 5450 शिक्षार्थी 21 सितंबर 2025 को परीक्षा दे चुके हैं, जबकि शेष शिक्षार्थियों की परीक्षा मार्च 2026 में आयोजित की जाएगी।

यह उपलब्धि ब्लॉक शिक्षा विभाग, सर्वेयरों और साक्षरता टीम के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
कार्यशाला में बताया गया कि जो शिक्षार्थी “उलास ऐप” के माध्यम से प्रमाण पत्र प्राप्त करेंगे, उन्हें ओपन बोर्ड के माध्यम से 10वीं कक्षा की परीक्षा देने का अवसर भी मिलेगा, जिससे वे आगे की शिक्षा प्राप्त कर सकें।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर भी दी जानकारी

मुख्य वार्ताकार ताराचंद जांगिड़ ने विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की जानकारी देते हुए बताया कि 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक बीएलओ घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाएंगे।
उन्होंने बताया कि नागरिक केवल दो फोटो और हस्ताक्षर के साथ अपना विवरण भरें, ताकि मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाया जा सके।
उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 – सबके लिए शिक्षा का संकल्प

मुख्य वार्ताकार नेमीचंद यादव ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य शिक्षा को जीवन से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें संख्या ज्ञान, जीवन कौशल, व्यावसायिक शिक्षा, और डिजिटल दक्षता का समावेश आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षकों और स्वयंसेवकों से अपील की कि वे इस मिशन को घर-घर तक पहुँचाने में सहयोग करें।

अधिकारियों ने दिए प्रेरक संदेश

उपपंजीयक अधिकारी आदित्य मेहरा ने SIR प्रणाली के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रणाली से ब्लॉक स्तर पर कार्यों की रिपोर्टिंग पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक साक्षरता प्रभारी और सर्वेयर को अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए ताकि 2027 तक ब्लॉक जवाजा पूर्ण साक्षरता का उदाहरण बन सके। कार्यक्रम में अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हर्षवर्धन शर्मा ने कहा कि “साक्षरता ही सामाजिक विकास की पहली सीढ़ी है। शिक्षक, सर्वेयर और साक्षरता कर्मी इस अभियान की रीढ़ हैं। जब तक गांव-गांव ज्ञान की ज्योति नहीं जलेगी, तब तक विकास अधूरा रहेगा।”

> Raju:
वहीं अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कैलाश चंद ने कहा कि “साक्षरता कार्यक्रम केवल एक योजना नहीं, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का अभियान है।
हमारा लक्ष्य है कि हर व्यक्ति पढ़ना, समझना और आत्मनिर्भर बनना सीखे। साक्षरता के माध्यम से ही समाज में समानता और संवेदनशीलता स्थापित की जा सकती है।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कविता मौर्य ने कहा कि “साक्षरता का प्रकाश ही समाज को मजबूत बनाता है। जवाजा ब्लॉक आने वाले वर्षों में राज्य के सर्वश्रेष्ठ साक्षर ब्लॉकों में शामिल होगा।”
कार्यक्रम का संचालन नेमीचंद यादव और दक्ष प्रशिक्षक भैरूसिंह टॉडगढ़ ने किया और आभार साक्षरता ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सुरेन्द्र सिंह ने व्यक्त किया।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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