69वीं जिला स्तरीय साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ , मालीपुरा आयोजित

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69वीं जिला स्तरीय साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ , मालीपुरा आयोजित

जवाजा मालीपुरा। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मालीपुरा में बुधवार, 12 नवंबर से 69वीं जिला स्तरीय साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद प्रतियोगिता 2025 का शुभारंभ बड़े ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। यह प्रतियोगिता 15 नवंबर तक आयोजित की जाएगी। विद्यालय परिसर को रंगीन झंडों और आकर्षक सजावट से सजाया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) ब्यावर अनिल कुमार शर्मा रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलन कर प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने का माध्यम बनती हैं और उनमें अनुशासन, टीम भावना एवं आत्मविश्वास का संचार करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से खेल भावना को बनाए रखने और हर गतिविधि में पूरी निष्ठा के साथ भाग लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन जय सिंह चौहान ने प्रभावशाली ढंग से किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य (पीईईओ) अंजू यादव, शिक्षक नेता एवं पूर्व प्रधानाचार्य धन्ना सिंह रावत, चंपालाल, भीमराज भाटी, विमल कुमार, सीताराम, अनीता ढाका, केशव कुमार, पुष्पेंद्र सिंह, नीतू चौहान, प्रियंका सैनी सहित सैकड़ों शिक्षक, विद्यार्थी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने प्रतियोगिता के सुचारु आयोजन की सराहना की और विद्यालय परिवार की प्रशंसा की।

प्रतियोगिता के पहले दिन छात्रों ने खेल, साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। कबड्डी, खो-खो, एथलेटिक्स, कविता पाठ, वाद-विवाद, नृत्य और गीत प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यालय का वातावरण दिनभर तालियों की गूंज और उत्साह से सराबोर रहा।

प्रतियोगिता का समापन समारोह 15 नवंबर को आयोजित किया जाएगा, जिसमें विजेताओं को प्रमाणपत्र और ट्रॉफियों से सम्मानित किया जाएगा।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।