दपट्टा विद्यालय में ठंड से बचाव की मिसाल, स्टाफ ने निजी खर्च से बांटे स्वेटर

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जवाजा। राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय दपट्टा में विद्यालय स्टाफ द्वारा विद्यार्थियों के हित में एक अनुकरणीय पहल की गई। ठंड के मौसम को देखते हुए विद्यालय परिसर में स्वेटर वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें कक्षा 1 से 8 तक अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को स्वेटर वितरित किए गए।

इस अवसर पर प्रधानाध्यापक अमरसिंह, अध्यापक दूधसिंह, कमल प्रसाद शर्मा सहित समस्त विद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम में एसएमसी अध्यक्ष गणपतसिंह, वार्ड पंच रूपी देवी, विद्यालय विकास समिति के कोषाध्यक्ष रूपसिंह, सदस्य हजारीसिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं अभिभावक मौजूद रहे।

विद्यालय स्टाफ ने निजी स्तर पर कुल ₹28,800 की लागत से विद्यार्थियों को स्वेटर उपलब्ध कराए। स्वेटर पाकर बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला तथा उन्होंने अपने शिक्षकों के प्रति आभार जताया।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों में सहयोग, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करते हैं। विद्यालय परिवार ने भविष्य में भी विद्यार्थियों के कल्याण हेतु इस प्रकार के सेवा कार्य निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।