जवाजा में ड्रेनेज निर्माण कार्य में लापरवाही, हादसे को न्योता श्री यादें बिल्डिंग मटेरियल के आगे टूटा ढक्कन, बच्चों की जान पर खतरा

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जवाजा।
कस्बे में चल रहे ड्रेनेज निर्माण कार्य में लापरवाही का मामला सामने आया है। श्री यादें बिल्डिंग मटेरियल के आगे की ओर हाल ही में बनाए गए ड्रेनेज पर लगाया गया ढक्कन अचानक टूट गया, जिससे गंभीर हादसे की आशंका बनी हुई है। निर्माण कार्य अभी जारी है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है।

स्थानीय निवासी प्रकाश प्रजापत ने बताया कि उक्त स्थान पर प्रतिदिन एक निजी स्कूल की बस रुकती है, जहां से करीब 20 बच्चे रोज बस में सवार होते हैं। टूटे ढक्कन के कारण खुला ड्रेनेज बच्चों, राहगीरों और वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा बन गया है। किसी भी समय कोई बच्चा या राहगीर इसमें गिर सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही किसी प्रकार की अस्थायी घेराबंदी की गई है। स्कूल समय में बच्चों की भीड़ के चलते खतरा और बढ़ जाता है, इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

ग्रामीणों ने संबंधित विभाग व प्रशासन से मांग की है कि ड्रेनेज निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा श्री यादें बिल्डिंग मटेरियल के सामने टूटे ढक्कन को तुरंत बदलकर निर्माण स्थल को सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी बड़े हादसे को समय रहते रोका जा सके।

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जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

जवाजा। राजियावास गांव में मंगलवार को इंसानियत, करुणा और वफादारी की ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया। गांव में वर्षों से हर अंतिम यात्रा में बिना बुलाए शामिल होने वाले उस वफादार कुत्ते का निधन हो गया, जिसे ग्रामीण स्नेहपूर्वक “मूक सेवक” कहते थे। कुत्ते की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। गांव के सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत ने बताया कि यह कुत्ता गांव में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर स्वतः मृतक के घर पहुंच जाता था। न केवल अंतिम यात्रा में शामिल होता, बल्कि श्मशान घाट में अंतिम संस्कार, शोकसभा और उठावना सम्पन्न होने तक वहीं बैठा रहता था। शोकसभा पूरी होने के बाद ही वह वहां से जाता था। उसकी इस निस्वार्थ सेवा-भावना और संवेदनशील व्यवहार ने पूरे गांव का दिल जीत लिया था। मंगलवार सुबह यह कुत्ता सड़क किनारे मृत अवस्था में मिला। कुछ ही समय में यह खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहमति से उसके अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं। ग्रामीणों ने बताया कि आमतौर पर आवारा कुत्तों की मौत या तो सड़क हादसों में हो जाती है या बीमारी के कारण कीड़े पड़ने जैसी दर्दनाक स्थिति में होती है, लेकिन इस मूक सेवक कुत्ते की मृत्यु किसी एक्सीडेंट या हिंसक कारण से नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार उसकी मौत सामान्य (नॉर्मल) कारणों से हुई, जिसे वे उसकी सेवा-भावना और पुण्य कर्मों का प्रतिफल मान रहे हैं। सुबह करीब 11 बजे आशापुरा माता मंदिर से डीजे साउंड पर रामधुन के साथ कुत्ते की अंतिम यात्रा निकाली गई, जो गांव के मुख्य मार्गों से होती हुई राजियावास हिंदू मुक्तिधाम पहुंची। वहां विधि-विधान पूर्वक उसका अंतिम संस्कार किया गया। इसके पश्चात शोकसभा और उठावना की रस्म भी पूरी श्रद्धा के साथ अदा की गई। ग्रामीणों ने बताया कि इस अनोखे मूक सेवक कुत्ते का उठावना आज शाम आशापुरा माता मंदिर के पास स्थित धर्मशाला में किया जाएगा, जबकि इसका बारहवां कार्यक्रम आगामी 15 जनवरी को रखा गया है। अंतिम यात्रा और संस्कार में सरपंच प्रशासक ब्रजपालसिंह रावत, समाजसेवी किशनसिंह (सीआरपीएफ), मंगलसिंह, महेन्द्रसिंह, छितरसिंह, वार्ड पंच कल्याणसिंह, उदय सिंह, भरतसिंह, नैनासिंह, कालूराम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने इस मूक जीव की वफादारी, सेवा-भाव और संवेदनशीलता को याद करते हुए उसे नम आंखों से अंतिम विदाई दी।